शरीर के नेत्रों से नहीं अपितु अंदर की रौशनी से संसार को देखें"- ब्रह्माकुमारी गोपी दीदी, लंदन

शरीर के नेत्रों से नहीं अपितु अंदर की रौशनी से संसार को देखें"- ब्रह्माकुमारी गोपी दीदी, लंदन

वर्तमान रोल के अनुसार नहीं अभी  तो अपने मूलभूत गुणों के साथ कर्म करें

"शरीर के नेत्रों से नहीं अपितु अंदर की रौशनी से संसार को देखें"- ब्रह्माकुमारी गोपी दीदी, लंदन

इंदौर, । प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के न्यू पलासिया स्थित ज्ञानशिखर, ओमशांति भवन में लंदन से पधारी राजयोगिनी गोपी दीदी के पावन सानिध्य में तीन दिवसीय योग तपस्या कार्यक्रम का दीप प्रज्वलन के साथ शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर  मातृशक्ति के समूह को संबोधित करते हुए गोपी दीदी ने कहा कि मातृशक्ति के अंदर 
कई ऐसे स्वाभाविक गुण होते हैं- त्याग, दया, करुणा, रहम। बच्चों की कैसी भी कमी-कमजोरी, बुराइयों को समाकर शुभकामना, कल्याण की भावना रख परिवर्तन कर देती हैं। यह सभी गुण परमात्मा पिता के भी गुण हैं इसीलिए ज्ञान सागर परमात्मा इस सृष्टि पर अवतरित होते हैं तो ज्ञान का कलश मातृशक्ति के ऊपर रखते हैं।माताओं को सिर्फ अपने परिवार के कुछ लोगों के प्रति ही नहीं अपितु स्वयं में जगत माता का भाव रखते हुए बेहद की भावना से सब के प्रति जिम्मेवारी निभानी हैं। आपने दादी जानकी जी का उदाहरण देते हुए बताया की दादी जानकी हमेशा स्वयं को विश्व की मां समझकर पांचो द्वीपों में आध्यात्म का परचम फहराया।

आगे आपने बताया कि जब हम शरीर के नेत्रों से देखते हैं तो कोई हमें अच्छा लगता है या किसी की कमियां दिखाई देती हैं अनेक भेदभाव मन में उत्पन्न होते हैं। यदि हम आत्मा समझकर भीतर की रोशनी से अपने मूलभूत गुणों के साथ कर्म करेंगे तो सब में गुण दिखाई देंगें और हमारे कर्म भी श्रेष्ठ होंगे।

आपने जीवन के महत्व को बताते हुए सफलता के लिए कई टिप्स बताये -
▫️मन में किसी के भी प्रति ईर्ष्या, नफरत, घृणा होगी तो बुद्धि की शक्ति घट जाएगी, निर्णय शक्ति कमजोर हो जाएगी। अतः सब के प्रति शुभ भावना रखें।
▫️रात को सोने के पहले मन को हल्का करें। दिन भर की बातें ईश्वर पिता को सौंपकर ईश्वरीय ज्ञान का चिंतन कर सोएं। 
▫️प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर मोबाइल, आदि ना देखें, कुछ समय मेडिटेशन करें।सवेरे-सवेरे परमात्मा से शक्ति और वरदान लेवें, यही शक्ति हमारे लिए दुआएं बन जायेंगी। ▫️अपने अंदर बहुत ज्यादा सूचनाओं का भंडार जमा न करें, आवश्यकता अनुसार सकारात्मक सोच को ही स्थान दें।

इस अवसर पर इंदौर जोन की क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने गोपी दीदी का स्वागत सम्मान करते हुए बताया कि गोपी दीदी मूलतः अफ्रीका में पली बड़ी तथा ब्रिटेन और भारत में शिक्षित हुईं। उनके व्यक्तित्व में पूर्व की आध्यात्मिक विरासत और पश्चिम की आधुनिक सोच का सुंदर समन्वय है। उन्होंने लंदन में रहते हुए ईश्वरीय ज्ञान की प्राप्ति की तथा 40 वर्षों से समर्पित रूप से विश्व के कोने-कोने में अंतर्राष्ट्रीय आध्यात्मिक वक्ता एवं अनुभवी राजयोग शिक्षिका के रूप में लाखों आत्माओं के जीवन में परिवर्तन ला रही है। 

कार्यक्रम के शुभारंभ में ब्रह्माकुमारी उषा दीदी एवं आस्था बहन ने तिलक, बैच एवं गुलदस्ते द्वारा स्वागत किया। कुमारी नियति ने गीत के माध्यम से तथा नन्ही कुमारी दीवी पाठक ने सुंदर नृत्य कर सभी का मन मोह लिया।कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमारी अनीता दीदी ने किया।